Tuesday, April 9, 2024

पंचांग के पाँच अंग होते हैं- ‘तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।’

 चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल में भारतीय मनीषियों ने कालगणना के लिए ब्रह्माण्ड का बहुत सूक्ष्मता से अध्ययन करते हुए भारतीय वैदिक ज्योतिष के आधार पर पंचांग बनाया। 

पंचांग के पाँच अंग होते हैं- ‘तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।’


इन पाँच अंगों के योग के कारण ही इसे पंचांग कहा जाता है। 

हम मनुष्यों की देह भी पंचतत्व का योग है, यदि हमारे पाँच तत्व कालगणना के पाँच अंगों की लय से लय मिलाकर चलते हैं तब हमारा जीवन प्रलय का भागी नहीं होता क्योंकि प्रकृति की लय से लय टूटना ही प्रलय कहलाता है। इसलिए हिन्दू धर्म में पंचांग को परामर्शदाता कहा जाता है इसके परामर्श के बिना कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते। 

नव रात्रि और नव वर्ष के इस पावन अवसर पर परमब्रह्म परमात्मा से प्रार्थना है कि वे हमें भक्ति, शक्ति, युक्ति से सम्पन्न करें जिससे हम सोमवार से लेकर रविवार तक सातों वारों को शुचितापूर्वक साधते हुए अपने-अपने परिवारों का समुचित रक्षण, भरण, पोषण करते हुए अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को सार्थकता प्रदान कर सकें। आप सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं शुभम भवतु~# कॉपी फ्रॉमआशुतोष_राना 🌹🙏😊

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